आरसी
/ɑːrsī/
संज्ञा
Origin
संस्कृत
आदर्श — दर्पण या आईना
Overview
Meaning Now
- अंगूठे में पहनी जाने वाली एक छोटी सी आईना (दर्पण), जिसका उपयोग प्राचीन काल में शृंगार के लिए किया जाता था।
- किसी वस्तु का प्रतिरूप या दर्पण।
Literal older meaning
दर्पण या आईना
Language path
संस्कृत → प्राकृत/अपभ्रंश → हिंदी
Earliest form
आरसी
Earliest period
मध्यकालीन हिंदी
Journey
आरसी मुगलकालीन और उससे पहले की भारतीय संस्कृति में महिलाओं के श्रृंगार का एक अभिन्न अंग थी। इसे अंगूठी की तरह अंगूठे में पहना जाता था ताकि चलते-फिरते भी अपना चेहरा देखा जा सके। लोकगीतों और कृष्ण-काव्य में इसका उल्लेख नायिका के श्रृंगार के संदर्भ में बार-बार मिलता है।
Evolution
- संस्कृत
आदर्श
“दर्पण”
- प्राकृत
आअस
“दर्पण”
- हिंदी
आरसी
“अंगूठे में पहनने वाली छोटी आईना”
Connections
Related across languages
प्राकृत
आअस
दर्पण
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